पिछले कई सालों से एक घटिया राजनीतिक खेल चल रहा है, जिसका सीधा शिकार सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम समुदाय है। आपको बार-बार एक ही बेतुका डर दिखाया जाता है, जिसे ये तथाकथित ‘सेक्युलर’ पार्टियाँ और उनके पालतू बुद्धिजीवी हर प्लेटफॉर्म पर दोहराते हैं:
“खबरदार! ट्रिपल तलाक पर आवाज़ मत उठाना, वक्फ बोर्ड पर सवाल मत करना, CAA-NRC का विरोध ज़ोर से मत करना, टोपी मत लगाओ, दाढ़ी मत बढ़ाओ!, लिंचिंग पर सवाल मत करो, तुम्हारे दीन पर हमला हो चुप रहो, वरना… वरना क्या होगा? हिंदू नाराज़ हो जाएगा, और सारा का सारा वोट BJP की झोली में चला जाएगा। और तब… तब ये ‘लोकतंत्र’ खतरे में आ जाएगा!”
यह सब बकवास है! सरासर राजनीतिक बुज़दिली और मक्कारी है!
क्या सच में देश का हर हिंदू इतना कमज़ोर है कि आपकी टोपी या आपकी माँग से नाराज़ होकर देश को बांटने वाली पार्टी को वोट देगा? नहीं! नाराज़ वो होगा जो ‘हिंदुत्ववादी सोच’ रखता है। बीजेपी तो उस हिंदुत्व की फैक्टरी है, जो खुली नफ़रत बेचती है। लेकिन ये ‘सेक्युलर’ पार्टियाँ? इनका क्या? ये क्यों वही डर दिखा रही हैं?
जवाब सिर्फ एक है: VOTE!
यह एक घिनौना गठजोड़ है। ये सेक्युलर दल आपको BJP का भूत दिखाकर आपका थोक वोट लेते हैं। और फिर जब आपके हक़ की बात आती है जब मस्जिदों पर खतरा आता है (चाहे संभल हो या फिर संजौली), जब आपके बच्चों के लिए शिक्षा/रोजगार की बात आती है, जब आपको राजनीतिक हिस्सेदारी चाहिए होती है, तब ये तुरंत हाथ पीछे खींच लेते हैं, बिहार चुनाव का जीता जागता सबूत है। ऐसा क्यों होता है? वही पुराना बहाना: “माफ़ करना, हमें हिंदुओं को पोलराइज़ होने से बचाना है!”
यानी आपका वोट इनकी गद्दी बचाएगा, लेकिन आपकी आवाज़ इनकी सियासत डूबा देगी!
ये लोग सिर्फ बीजेपी के डर को हथियार बनाकर, मुस्लिम वोटों की ‘भिक्षा’ माँगते हैं। इनकी ‘वोट बैंक मैनेजमेंट’ देखिए! ये न केवल मुस्लिम समुदाय को चुप रहने को कहते हैं, बल्कि खुद भी शांति से हो रहे अत्याचार को देखते हैं।
जब कभी कोई मुस्लिम नेता अपने ऊपर होने वाली अत्याचार पर सवाल उठाता है, तो ये तथाकथित सेक्युलर पार्टियां अपने 4-6 ‘दरबारी मुसलमानों’ को छोड़ देते हैं, यह समझाने के लिए कि चुप रहना ‘शियासत’ है, ‘लोकतंत्र को बचाना’ है, ‘भाजपा को हराना है’ और ‘देश के लिए कुर्बानी’ देना है। अरे! कुर्बानी देनी है तो अपनी ज़ुबान की दो, अपने पदों की दो।
सच्चाई यह है
लोकतंत्र खतरे में नहीं, खतरे में है इन तथाकथित सेक्युलर दलों का ‘वोट बैंक मैनेजमेंट’, इन्हें डर है कि अगर मुसलमान ‘डरना’ बंद कर देंगे और अपने हक़ के लिए ज़ोरदार आवाज़ उठाएँगे, तो इनका ‘सेक्युलर दुकानदारी’ का पूरा धंधा बैठ जाएगा। इन्हें डर है कि तब ये बीजेपी को दिखाकर वोट नहीं माँग पाएँगे।
जागिए! आपका डर, इनकी सबसे बड़ी ताक़त है! इस ‘वरना’ को कूड़ेदान में डालिए!

